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Migraine: Symptoms, Causes, and Treatments .

 माइग्रेन: लक्षण, कारण और उपचार सूची परिचय माइग्रेन के कारण माइग्रेन के लक्षण माइग्रेन का निदान माइग्रेन के उपचार आहार और लाइफस्टाइल बदलाव माइग्रेन से बचाव आपके प्रश्न 1. परिचय माइग्रेन एक चिकित्सीय समस्या है जो मस्तिष्क के किसी विशेष हिस्से में होने वाली एकाग्रता और बेचैनी के कारण होती है। यह आमतौर पर एक ओर से दर्द के रूप में प्रकट होता है और यह दर्द सामान्य दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। माइग्रेन आमतौर पर एक अनुमानित समयानुसार होती है, जिसमें लगभग 4 से 72 घंटे तक का समय होता है। 2. माइग्रेन के कारण माइग्रेन के कारण विभिन्न हो सकते हैं। कुछ मामूली माइग्रेन तत्वों में लैटाइट और शोरगुल समाविष्ट होते हैं, जबकि कुछ गंभीर माइग्रेन के कारण भी हो सकते हैं, जैसे कि यूनिका का बढ़ता विनाशकारी तंत्र, मस्तिष्क की संरचना में बदलाव, हार्मोनल परिवर्तन और न्यूरोलॉजिकल कारण। 3. माइग्रेन के लक्षण माइग्रेन के लक्षण व्यक्ति से व्यक्ति भिन्न हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जैसे कि: दर्द का स्थानीयकरण (एक ओर) दर्द की तीव्रता (मध्यम से तेज) दर्द का घूर्णनात्मक असर उबकाई और मतली बिना उपच...

Anthropocene: The Arrival of the Human Age .

 आंथ्रोपोसीन: मानव-युग का आगमन Anthropocene: The Arrival of the Human Age . परिचय आंथ्रोपोसीन शब्द जब हमारे मन में आता है, तो हमारे मन में पृथ्वी की परिस्थिति और मानवता के रिश्तों की बदलती हुई दृष्टि आती है। यह एक युग है जिसमें मानव अपनी पर्यावरणिक, सामाजिक, और आर्थिक प्रभावशीलता के कारण पृथ्वी पर एक नया समय चिह्नित कर रहा है। इस लेख में, हम आंथ्रोपोसीन के बारे में विस्तृत चर्चा करेंगे और इसके प्रमुख विशेषताओं, प्रभावों, और चुनौतियों को जानेंगे। आंथ्रोपोसीन क्या है? आंथ्रोपोसीन शब्द "आंथ्रो" (मानव) और "पोसीन" (युग) से मिलकर बना है। इसका अर्थ होता है "मानव-युग"। यह एक नया भूगोलिक युग है जिसमें मानव अपने वातावरण पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। आंथ्रोपोसीन में मानवता ने पृथ्वी की जीवनशैली, जलवायु, वनस्पति, और जैव विविधता में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। आंथ्रोपोसीन के प्रमुख प्रभाव जलवायु परिवर्तन: आंथ्रोपोसीन के कारण मानव गतिविधियों ने जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं। वन नष्टि, जल प्रदूषण, उद्योगीकरण, और जल-औद्योगिकी ने पृथ्वी की तापमान वृद्धि, बाढ़...